चम्पावत। जिले में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन शुरू हो गया है। इस वर्ष ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ थीम के साथ चलाए जा रहे अभियान का उद्देश्य केवल पोषण जागरूकता तक सीमित न रहकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बच्चों के प्रारंभिक विकास और महिला सशक्तीकरण को जनभागीदारी से मजबूत करना है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पोषण माह की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से धरातल तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चे ही सशक्त समाज की मजबूत नींव हैं। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य, देखभाल और बच्चों के प्रारंभिक विकास का प्रभावी केंद्र बनाने तथा प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
इस पहल की खास बात यह है कि पोषण अभियान को केवल विभागीय कार्यक्रम न रखकर जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, बच्चों और अभिभावकों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक किया जाएगा। स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों, दालों, मोटे अनाज, फल-सब्जियों और दूध जैसे पौष्टिक आहार के महत्व को भी लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती प्रेमा पाण्डेय ने महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार एवं नियमित शारीरिक सक्रियता को जरूरी बताया। वहीं विधायक प्रतिनिधि प्रकाश तिवारी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्तियों की जमीनी भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
कार्यक्रम के दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का संदेश देते हुए पुष्पा बिष्ट, रेनू पाण्डेय, रंजना जोशी एवं कविता बडौला की गोद भराई कर उन्हें पोषण किट प्रदान की गई। वहीं अनिता चौधरी एवं दीपा चौधरी को महालक्ष्मी किट वितरित की गई।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों पर आहार विविधता, पर्याप्त प्रोटीन, पौष्टिक हॉट कुक्ड मील, सामुदायिक सहभागिता, बच्चों के प्रारंभिक विकास एवं उद्दीपन तथा प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
कुल मिलाकर चम्पावत में राष्ट्रीय पोषण माह को सरकारी अभियान से आगे बढ़ाकर परिवार, आंगनवाड़ी और समुदाय की साझा जिम्मेदारी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं। ‘मेरी आंगनवाड़ी, मेरी जिम्मेदारी’ की भावना मजबूत होने से जिले में स्वस्थ मातृत्व, सुपोषित बचपन और महिला सशक्तीकरण को नई गति मिलने की उम्मीद है।


