टनकपुर नगर में पिछले कई वर्षों से निराश्रित, घायल और सड़क दुर्घटनाओं में घायल गोवंश की सेवा कर रही पंचमुखी गौशाला बचाव संघर्ष समिति इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। गौशाला को ध्वस्त अथवा स्थानांतरित किए जाने की संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में समिति और नगर के सैकड़ों नागरिक एकजुट हो गए हैं।

गौशाला समिति का कहना है कि पिछले डेढ़ दशक से यह स्थान असहाय गोवंश के लिए जीवनदाता साबित हुआ है। वर्तमान में यहां लगभग 80 गोवंश सुरक्षित हैं। खास बात यह है कि गौशाला राजकीय पशु चिकित्सालय के समीप स्थित है, जिससे घायल एवं बीमार पशुओं को तत्काल उपचार मिल पाता है। रात्रिकालीन आपात स्थिति में भी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध हो जाती है, जो अन्य स्थान पर संभव नहीं होगी।

समिति के सदस्यों का कहना है कि यह सेवा पूर्णतः जनसहयोग और निजी संसाधनों से संचालित हो रही है। नगर के अनेक परिवार अपने घरों से चारा, भूसा और अन्य आवश्यक सामग्री लाकर गोवंश की सेवा करते हैं। यदि कहीं कोई गाय या बछड़ा दुर्घटनाग्रस्त अवस्था में मिलता है तो यही समूह उसे मौके से उठाकर गौशाला लाता है और उपचार कराता है।
समिति का आरोप है कि मार्च माह के प्रथम सप्ताह में पुनः गौशाला को हटाने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर गौ-सेवकों, मातृशक्ति और युवाओं में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि गौशाला को किसी भी परिस्थिति में टूटने नहीं दिया जाएगा और यदि बलपूर्वक कार्रवाई की गई तो शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक जनआंदोलन, आमरण अनशन और प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
गौ-सेवकों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—
पंचमुखी गौशाला को तत्काल प्रभाव से ध्वस्त अथवा स्थानांतरित करने की प्रक्रिया निरस्त की जाए।
गौशाला को यथास्थान स्थायी रूप से संरक्षित घोषित किया जाए।
समिति को बिना हस्तक्षेप पूर्ववत सेवा कार्य करने दिया जाए।
नगरवासियों का कहना है कि यह केवल एक भूमि या भवन का प्रश्न नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और पशु-प्रेम से जुड़ा विषय है। उनका आग्रह है कि शासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसा समाधान निकाले जिससे गौ-सेवा निरंतर चलती रहे और किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न न हो।।



GIPHY App Key not set. Please check settings