टनकपुर।
जनपद चंपावत के सीमांत गांवों में वर्षों से जंगली हाथियों और वन्यजीवों के आतंक से परेशान ग्रामीणों के लिए अब राहत की उम्मीद जागी है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद वन विभाग ने टनकपुर क्षेत्र के गैडाखाली नंबर-1 और ऊचौलीगोठ गांवों में आधुनिक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्थाओं के जरिए मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
वन विभाग द्वारा जहां एक ओर पत्थर की सुरक्षा दीवार निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर एआई आधारित स्मार्ट सोलर पावर्ड वाइल्डलाइफ डिटेक्शन कैमरा सिस्टम की स्थापना ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच बनकर सामने आ रही है।
यह हाईटेक कैमरा हाथियों जैसे बड़े वन्यजीवों की पहचान करते ही सायरन बजाकर गांवों को पहले ही अलर्ट कर देता है। इतना ही नहीं, इसकी सूचना मोबाइल एप और व्हाट्सएप के माध्यम से वन अधिकारियों तक भी तत्काल पहुंचती है, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार उन्हें लग रहा है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है। लंबे समय से फसलों और संपत्ति को नुकसान झेल रहे लोगों के बीच अब सुरक्षा और भरोसे का माहौल बन रहा है।
वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (RRT) लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही है, जबकि जंगलों के भीतर जलकुंडों और वाटरहोल में पानी की व्यवस्था कर वन्यजीवों को आबादी की ओर आने से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
गत वर्ष लगभग 13 किलोमीटर सोलर फेंसिंग की मरम्मत और नई फेंसिंग लगाने के साथ सोलर स्ट्रीट लाइटों की स्थापना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
मानवता और आधुनिक तकनीक का यह संगम अब टनकपुर क्षेत्र में नई उम्मीद लेकर आया है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में उत्तराखंड के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जा सकती है।



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