
भारतवर्ष में आज पवित्र वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। उत्तराखंड के चम्पावत जनपद सहित विभिन्न नगरों और गांवों में सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर बरगद यानी वट वृक्ष के नीचे एकत्रित हुईं और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की।

महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए व्रत रखा। वट वृक्ष के चारों ओर धागा बांधकर महिलाओं ने माता सावित्री और सत्यवान की कथा सुनी तथा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा।
मान्यता है कि आज ही के दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और तपस्या के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
इस अवसर पर चम्पावत जिले के टनकपुर, बनबसा और आसपास के क्षेत्रों में भी महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर धार्मिक भजनों और मंगल गीतों के साथ पर्व को हर्षोल्लास से मनाया।
आज के दिन शनि जयंती का भी विशेष महत्व होने के कारण मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आया।
“अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना को लेकर चम्पावत में महिलाओं ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ वट सावित्री व्रत मनाया। बट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।”


