नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने और समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से बुधवार को चम्पावत जिले में नेत्रदान पखवाड़े के तहत व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला अस्पताल चम्पावत के साथ-साथ उपजिला अस्पताल लोहाघाट एवं उपजिला अस्पताल टनकपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने लोगों को नेत्रदान के महत्व और इसकी प्रक्रिया की जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान लोगों को बताया गया कि मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम बन सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से नेत्रदान को लेकर जागरूकता फैलाने और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान ने कहा कि नेत्रदान वास्तव में महादान है। किसी व्यक्ति के दुनिया से जाने के बाद उसके द्वारा किया गया नेत्रदान किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी और उम्मीद ला सकता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान को लेकर समाज में मौजूद भ्रांतियों को दूर करना जरूरी है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसके लिए आगे आएं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कार्यक्रमों में उपस्थित लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, इसके महत्व तथा इससे मिलने वाले सामाजिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही लोगों से अपने परिवार, आसपास के लोगों और समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई।
नेत्रदान पखवाड़े का संदेश साफ है—एक व्यक्ति के जाने के बाद भी उसकी आंखें किसी दूसरे के जीवन में उजाला कर सकती हैं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नेत्रदान के महत्व को समझते हुए समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया

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