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: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर टनकपुर में विधिक जागरूकता शिविर, युवाओं को शिक्षा और अधिकारों के प्रति किया प्रेरित

“युवा शक्ति ही राष्ट्र की सच्ची शक्ति” — कलाम के विचारों से प्रेरित होकर विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें युवा: रुचिका नरूला

टनकपुर, 15 अक्टूबर। भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर गुरुवार को टनकपुर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंपावत के दिशा-निर्देशों के क्रम में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को शिक्षा, अधिकारों और सामाजिक जागरूकता के महत्व से अवगत कराते हुए डॉ. कलाम के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का नेतृत्व बाह्य न्यायालय टनकपुर की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रुचिका नरूला ने किया, जबकि अध्यक्षता कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने की। इस दौरान शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, पराविधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी), पुलिस कर्मियों एवं अन्य गणमान्य लोगों ने डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

सिविल जज रुचिका नरूला ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन शिक्षा, विज्ञान, स्वच्छता और समान अवसरों के महत्व का संदेश देता है। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर युवाओं को एक विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनने तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया।

अखबार बेचने से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर

शिविर में पीएलवी अधिकार मित्र बिजेंद्र अग्रवाल ने डॉ. कलाम के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने बताया कि डॉ. कलाम ने अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई जारी रखी और आगे चलकर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में अपने योगदान से उन्होंने देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने भारत के उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम तथा अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास में डॉ. कलाम के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2002 में वह भारत के राष्ट्रपति बने और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल भारत रत्न से सम्मानित हुए।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम और शिक्षा के बल पर अपने लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। डॉ. कलाम का जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इस अवसर पर बाह्य न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी राजन, हिमांशु, गणेश बोहरा, पुलिस विभाग के कर्मचारी, कॉलेज के शिक्षक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पीएलवी अजय गुर्रानी, अमित कुमार, राजेंद्र प्रसाद, कुंवर सिंह भंडारी, बिजेंद्र अग्रवाल, दिग्विजय सिंह तड़ागी, किरण गहतोड़ी, किरण जोशी, शमशाद बानो, राधिका अधिकारी, सुनील कुमार, अनिल कुमार, प्रमोद कुमार, अंजू बोहरा, कमला जोशी, सुनीता टम्टा तथा प्रो बोनो पीएलवी इजहार अली और सोनी जहां सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

Rajiv Gupta

Written by Rajiv Gupta

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