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“गढ़ भोज में महकी पहाड़ की रसोई, विद्यार्थियों ने दिखाई उत्तराखंड की समृद्ध खान-पान संस्कृति की झलक” —

मंडुवा, झंगोरा और गहत की दाल ने बिखेरी पहाड़ की खुशबू, राजकीय महाविद्यालय में गढ़ भोज का आयोजन 🌿

टनकपुर। राजकीय महाविद्यालय टनकपुर, चंपावत में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़ भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुपमा तिवारी ने किया।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अनुपमा तिवारी ने कहा कि गढ़ भोज उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति और परंपराओं की पहचान है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और पारंपरिक खान-पान से जोड़ने के साथ ही स्थानीय उत्पादों के संरक्षण और प्रोत्साहन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में प्रोफेसर आशुतोष ने स्थानीय खाद्य पदार्थों के पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. गोविंद सिंह बोरा ने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। वहीं प्रोफेसर बीपी ओली ने स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इनके संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार से स्थानीय कृषि और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

मुख्य वक्ता डॉ. मीनाक्षी ने विद्यार्थियों को पारंपरिक खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्यवर्धक गुणों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच भी पारंपरिक खान-पान की उपयोगिता और महत्व को समझना जरूरी है। डॉ. स्वाति ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को अपनी जड़ों, लोक संस्कृति और पारिवारिक ज्ञान से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का प्रदर्शन किया। मंडुवे की रोटी, झंगोरे की खीर, गहत की दाल, भट्ट की दाल, आलू के गुटके सहित अनेक स्थानीय व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए उत्तराखंड की पारंपरिक खान-पान संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में सविता, कोमल, ध्यान सिंह बोरा और सरिता आर्या सहित विद्यार्थियों ने प्रमुख रूप से प्रतिभाग किया। इस दौरान महाविद्यालय की मुख्य शास्ता प्रोफेसर खान, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर चौहान, डॉ. विजय डालाकोटी, डॉ. अविनाश, डॉ. पूनम, डॉ. चेतन, डॉ. दीपा, डॉ. ब्रह्मानंद, डॉ. विमल सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. किरण को कार्यक्रम के सफल एवं कुशल आयोजन के लिए प्राचार्य द्वारा बधाई दी गई। मंच संचालन डॉ. निशा ने किया।

गढ़ भोज कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी लोक संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और स्थानीय उत्पादों की महत्ता से जोड़ने के साथ ही उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सकारात्मक संदेश भी दिया।

Rajiv Gupta

Written by Rajiv Gupta

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