टनकपुर। पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने की दिशा में बुधवार को टनकपुर में सराहनीय पहल देखने को मिली। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एमएसएमई-डीएफओ, हल्द्वानी द्वारा प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), टनकपुर में जागरूकता एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब 120 कारीगरों एवं हितधारकों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि कारीगरों को केवल योजना की जानकारी देने तक सीमित न रखते हुए उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ब्रांडिंग, मार्केटिंग, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल वित्तीय सेवाओं जैसे आधुनिक विषयों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। इससे कारीगरों को अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने, बेहतर प्रस्तुतीकरण करने और उन्हें बड़े बाजार तक पहुंचाने की नई संभावनाओं से रूबरू कराया गया।

कार्यक्रम में गवर्नमेंट आईटीआई टनकपुर के कार्यदेशक श्री गिरीश चंद्र जोशी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती उमा रावत, प्रशासनिक अधिकारी श्री विजय नेगी सहित संस्थान का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।

पंजाब नेशनल बैंक, टनकपुर के शाखा प्रबंधक ने कारीगरों को बैंक की विभिन्न योजनाओं, ऋण सुविधाओं और वित्तीय साक्षरता के संबंध में जानकारी दी। साथ ही डिजिटल बैंकिंग, सुरक्षित बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाया।

वहीं इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के प्रतिनिधियों ने डिजिटल भुगतान और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के संबंध में जानकारी देते हुए कारीगरों को मौके पर ही QR कोड स्कैनर तैयार करने और बैंक खाते खोलने में सहायता प्रदान की।
कार्यक्रम में एसपीएमयू, देहरादून के राहुल श्रीवास्तव एवं आयुषी रावत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग और इसकी संभावनाओं पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि AI का इस्तेमाल व्यवसाय, उत्पादों की प्रस्तुति, प्रचार-प्रसार और बाजार विस्तार में किस तरह किया जा सकता है।
इसके साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर, चम्पावत के मैनेजर ने कारीगरों को आधुनिक मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग की रणनीतियों से अवगत कराया। उन्होंने अपने उत्पादों को आकर्षक तरीके से बाजार तक पहुंचाने और आधुनिक विपणन माध्यमों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
एमएसएमई-डीएफओ, हल्द्वानी के सहायक निदेशक श्री अमित मोहन ने भारत सरकार एवं एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कारीगरों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, बेहतर ब्रांडिंग और डिजिटल माध्यमों से जोड़कर कारीगर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
डीपीएमयू, चम्पावत के श्री योगेश मेलकानी ने जनपद में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत उपलब्ध प्रशिक्षण, कौशल विकास और अन्य सुविधाओं की जानकारी दी तथा कारीगरों को इनका लाभ उठाकर अपनी आजीविका और व्यवसाय को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में कारीगरों को यह संदेश दिया गया कि हुनर के साथ आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ जुड़ जाए तो स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिल सकती है। पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को कौशल उन्नयन, वित्तीय साक्षरता, डिजिटल लेन-देन, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सरकारी सहायता से जोड़ने की यह पहल निश्चित रूप से स्थानीय कारीगरों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।


